काले भट्ट (Black soybeans, Kala Bhatt)

                                           पहाड़ी व्यंजन स्वाद के साथ-साथ सेहत की कसौटी पर भी खरे उतरते हैं। पहाड़ के बुजुर्ग लोग मोटे अनाज के औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ थे, तभी तो मोटा अनाज उनके खान-पान का अहम हिस्सा होता था। काला भट्ट भी ऐसा ही मोटा अनाज है, जिसमें कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने के गुण हैं। पहाड़ में सोयाबीन यानी भट्ट की खेती होती है। पहाड़ी इलाकों में भट्ट की अलग-अलग तरह की किस्में मिलती हैं। पारंपरिक व्यंजनों में काले भट्ट (की दाल को खूब पसंद किया जाता है। मार्केट में इसकी खास डिमांड है। काले भट्ट से चुड़कानी, रसभात, दाल, भट्ट के डूबके जैसे कई व्यंजन बनाए जाते हैं। यही नहीं अब तो सोया सॉस, मोमो चंक, और न्यूट्रेला बनाने में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है। इससे नमकीन भी बनती है। चलिए आज आपको गुणकारी भट्ट के फायदे बताते हैं। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं

भट्ट की चुड़कानी बनाने की विधि / Method of Making Bhatt Ki Churdkani Recipe

Step 1: Churdkani बनाने के लिए सबसे पहले कड़ाही में तेल कर्म करें। गर्म तेल में जीरा और हींग डालें।

Step 2: अब इसमें भट्ट के दाने डालें। इसे तब तक भूनें, जबतक कि इसका बाहर का छिलका फट न जाए। भट्ट के दानों को मध्यम आंच में ही भूनें। ध्यान रखें कि भट्ट के दाने जलें नहीं।

Step 3: अब कड़ाही में गेहूं का आटा डालें। इसे तब तक भूनें, जबतक कि आटे का रंग भूरा (Brown) न हो जाए। आटे की भीनी-भीनी खूशबू आने लगेगी।

Step 4: अब सभी मसाले और नमक कड़ाही में डालें। इसे आधा मिनट तक भूनें। इसके बाद चार कप पानी डालें। थोड़ी देर ढककर रखें, बीच में करछी से चलाते रहें, ताकि आटा कड़ाही के पैंदे में न बैठे।

Step 5: अब आप देखोगे कि ग्रेवी का रंग बदल रहा होगा। शुरू में आटा भूरे रंग का था, लेकिन पानी डालने के बाद अब ये हरा काला रंग का हो गया होगा। इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लगेंगे।

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