Posts

Showing posts from June 15, 2020
Image
बिच्छू जैसा कि बिच्छू के डंक मारने पर त्वचा में झनझनी सी फ़ैल जाती है ठीक वैसे ही बिच्छू बूटी के पौधे को छूने पर भी होता है. यानी बिच्छू बूटी के पौधे को छूने पर आपके त्वचा में झनझनी या जलन जैसा महसूस होने लगता है. इसका वैज्ञानिक नाम अर्टिका डाईओका है. यदि हम इसके खेती की बात करें तो या अफ्रीका, यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में उपजाया जाता है. उपयोग 1. रक्त संचार में मदद खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करने वाले विटामिन सी और प्रचुर मात्रा में आयरन बिच्छू बूटी में पाया जाता है. अपने इसी गुण के कारण ये हमारे शरीर में रक्त संचार में वृद्धि, गावों को ठीक करने और शरीर के उपरी भागों में उर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है. 2. प्रेगनेंसी और मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक लेबर पेन से गुजरने वाली महिलाओं की परेशानी कम करने के लिए उन्हें बिच्छू बूटी से जुड़ी चाय पिने की सलाह दी जाती है. एक कोऐग्यलंट के रूप में काम करने वाला बिच्छू बूटी अधिक ब्लीडिंग होने से भी बचाता है. मासिक धर्म के दौरान बिच्छू बूटी के सेवन से महिलाएं ऐंठन और सुजन से काफी हद तक निजात...
Image
काले भट्ट (Black soybeans, Kala Bhatt)                                            पहाड़ी व्यंजन स्वाद के साथ-साथ सेहत की कसौटी पर भी खरे उतरते हैं। पहाड़ के बुजुर्ग लोग मोटे अनाज के औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ थे, तभी तो मोटा अनाज उनके खान-पान का अहम हिस्सा होता था। काला भट्ट भी ऐसा ही मोटा अनाज है, जिसमें कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने के गुण हैं। पहाड़ में सोयाबीन यानी भट्ट की खेती होती है। पहाड़ी इलाकों में भट्ट की अलग-अलग तरह की किस्में मिलती हैं। पारंपरिक व्यंजनों में काले भट्ट ( की दाल को खूब पसंद किया जाता है। मार्केट में इसकी खास डिमांड है। काले भट्ट से चुड़कानी, रसभात, दाल, भट्ट के डूबके जैसे कई व्यंजन बनाए जाते हैं। यही नहीं अब तो सोया सॉस, मोमो चंक, और न्यूट्रेला बनाने में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है। इससे नमकीन भी बनती है। चलिए आज आपको गुणकारी भट्ट के फायदे बताते हैं। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं । भट्ट की चुड...
Image
सोयाबीन सोयाबीन न केवल प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्त्रौत है बल्कि कई शारीरिक क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा सोया प्रोटीन का प्लाज्मा लिपिड एवं कोलेस्टेरॉल की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है और यह पाया गया है कि सोया प्रोटीन मानव रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा कम करने में सहायक होता है। निर्दिष्ट स्वास्थ्य उपयोग के लिए सोया प्रोटीन संभवतः पहला सोयाबीन घटक है। विश्व का 60% सोयाबीन अमेरिका में पैदा होता है। भारत मे सबसे अधिक सोयाबीन का उत्पादन मध्यप्रदेश करता है। मध्यप्रदेश में इंदौर में सोयाबीन रिसर्च सेंटर है। सोयाबीन में प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन ई, बी कॉम्लेक्स, थाइ‍मीन, राइबोफ्लेविन अमीनो अम्ल, सैपोनिन, साइटोस्टेरोल, फेनोलिक एसिड एवं अन्य कई पोषक तत्व होते हैं जो फायदेमंद होते हैं।                               इसमें भरपूर मात्रा में  आयरन  होता है जो खास तौर से महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है और एनिमिया व ऑस्ट‍ियोपोरोसिस से बचाने में लाभप्रद है। वहीं...