बिच्छू
जैसा कि बिच्छू के डंक मारने पर त्वचा में झनझनी सी फ़ैल जाती है ठीक वैसे ही बिच्छू बूटी के पौधे को छूने पर भी होता है. यानी बिच्छू बूटी के पौधे को छूने पर आपके त्वचा में झनझनी या जलन जैसा महसूस होने लगता है. इसका वैज्ञानिक नाम अर्टिका डाईओका है. यदि हम इसके खेती की बात करें तो या अफ्रीका, यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में उपजाया जाता है.
1. रक्त संचार में मदद
खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करने वाले विटामिन सी और प्रचुर मात्रा में आयरन बिच्छू बूटी में पाया जाता है. अपने इसी गुण के कारण ये हमारे शरीर में रक्त संचार में वृद्धि, गावों को ठीक करने और शरीर के उपरी भागों में उर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है.
2. प्रेगनेंसी और मासिक धर्म के दौरान
अत्यधिक लेबर पेन से गुजरने वाली महिलाओं की परेशानी कम करने के लिए उन्हें बिच्छू बूटी से जुड़ी चाय पिने की सलाह दी जाती है. एक कोऐग्यलंट के रूप में काम करने वाला बिच्छू बूटी अधिक ब्लीडिंग होने से भी बचाता है.
मासिक धर्म के दौरान बिच्छू बूटी के सेवन से महिलाएं ऐंठन और सुजन से काफी हद तक निजात पा सकती हैं. यह मासिक धर्म के बाद शरीर में होने वाले बदलाव को नियंत्रित करता है और ऐस्ट्रिन्जेंट के रूप में काम करते हुए रक्त प्रवाह को भी नियंत्रित करता है.
3. बालों के लिए
बिच्छू बूटी के कैप्स्यूल या चाय का इस्तेमाल आंतरिक रूप से बालों के झड़ने को रोकने में किया जता है. बाहरी रूप में आप इसका तेल भी बालों में लगा सकते हैं. इसके तेल को नारियल या सरसों के तेल के साथ मिक्स करके भी बालों में लगाया जा सकता है. इससे रुसी को भी रोका जा सकता है.
4. दिल के लिए
दिल को स्वस्थ रखने के लिए बिच्छू बूटी के लाभकारी गुण काम आते हैं. इससे बनी चाय को नियमित रूप से पिने पर लोवर सिस्टोलिक रक्तचाप को काफी हद तक कम किया जा सकता है. बिच्छू बूटी कार्डियोवास्कुलर सिस्टम पर तनाव को कम करने में भी मददगार है.
5. अस्थमा और लिबिडो
श्वसन संबंधी बीमारियाँ जैसे कि अस्थमा या मौसमी एलर्जी से निजात पाने के लिए भी बिच्छू बूटी का इस्तेमाल किया जाता है. कई शोधों से ये भी नतीजा निकला है कि इसके अर्क को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाने से एलर्जी की प्रतिक्रिया को नियंत्रिक कर सकते हैं. इससे बनी चाय अस्थमा पीड़ित को पीनी चाहिए.
बिच्छू बूटी हमारे शरीर में टेरेस्टेरॉन के स्तर को बढ़ाकर, शरीर में काफी देर तक उत्तेजना बनाए रख सकता है. इस गुण के कारण इसे सेक्स ड्राइव में सुधार का एक प्रभावी उपाय माना जाता है.
6. प्रोस्टेट के लिए
गंभीर बिमारी माने जाने वाले बढ़ा हुआ प्रोस्टेट और प्रोस्टेट कैंसर के विकास को रोकने में बिच्छू बूटी को प्रभावी माना गया है. लेकिन ये सिर्फ इसके विकास को ही रोकती है.
7. पेशाब के रास्ते में संक्रमण के लिए
बिच्छू बूटी अपने मूत्रवर्धक गुणों के लिए भी जाना जाता है. अपने इस गुण के कारण ये मूत्राशय में पथरी, मूत्राशय का संक्रमण और मूत्र सम्बन्धी अन्य समस्याओं के उपचार में मदद करता है. आपको बता दें कि ये लूज मोशन और पेचिश के उपचार में भी सहायक है.
8. ऑस्टियोपोरोसिस के लिए
बिच्छू बूटी में बोरॉन नामक तत्व पाए जाने की सम्भावना रहती है. हमारी हड्डियों को ठीक रखने के लिए जिम्मेदार कैल्शियम से बोरॉन को लिंक किया जाता है. कुल मिलकर ये ऑस्टियोपोरोसिस के प्रभाव को कम करने में काफी मददगार है.
खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करने वाले विटामिन सी और प्रचुर मात्रा में आयरन बिच्छू बूटी में पाया जाता है. अपने इसी गुण के कारण ये हमारे शरीर में रक्त संचार में वृद्धि, गावों को ठीक करने और शरीर के उपरी भागों में उर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है.
2. प्रेगनेंसी और मासिक धर्म के दौरान
अत्यधिक लेबर पेन से गुजरने वाली महिलाओं की परेशानी कम करने के लिए उन्हें बिच्छू बूटी से जुड़ी चाय पिने की सलाह दी जाती है. एक कोऐग्यलंट के रूप में काम करने वाला बिच्छू बूटी अधिक ब्लीडिंग होने से भी बचाता है.
मासिक धर्म के दौरान बिच्छू बूटी के सेवन से महिलाएं ऐंठन और सुजन से काफी हद तक निजात पा सकती हैं. यह मासिक धर्म के बाद शरीर में होने वाले बदलाव को नियंत्रित करता है और ऐस्ट्रिन्जेंट के रूप में काम करते हुए रक्त प्रवाह को भी नियंत्रित करता है.
3. बालों के लिए
बिच्छू बूटी के कैप्स्यूल या चाय का इस्तेमाल आंतरिक रूप से बालों के झड़ने को रोकने में किया जता है. बाहरी रूप में आप इसका तेल भी बालों में लगा सकते हैं. इसके तेल को नारियल या सरसों के तेल के साथ मिक्स करके भी बालों में लगाया जा सकता है. इससे रुसी को भी रोका जा सकता है.
4. दिल के लिए
दिल को स्वस्थ रखने के लिए बिच्छू बूटी के लाभकारी गुण काम आते हैं. इससे बनी चाय को नियमित रूप से पिने पर लोवर सिस्टोलिक रक्तचाप को काफी हद तक कम किया जा सकता है. बिच्छू बूटी कार्डियोवास्कुलर सिस्टम पर तनाव को कम करने में भी मददगार है.
5. अस्थमा और लिबिडो
श्वसन संबंधी बीमारियाँ जैसे कि अस्थमा या मौसमी एलर्जी से निजात पाने के लिए भी बिच्छू बूटी का इस्तेमाल किया जाता है. कई शोधों से ये भी नतीजा निकला है कि इसके अर्क को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाने से एलर्जी की प्रतिक्रिया को नियंत्रिक कर सकते हैं. इससे बनी चाय अस्थमा पीड़ित को पीनी चाहिए.
बिच्छू बूटी हमारे शरीर में टेरेस्टेरॉन के स्तर को बढ़ाकर, शरीर में काफी देर तक उत्तेजना बनाए रख सकता है. इस गुण के कारण इसे सेक्स ड्राइव में सुधार का एक प्रभावी उपाय माना जाता है.
6. प्रोस्टेट के लिए
गंभीर बिमारी माने जाने वाले बढ़ा हुआ प्रोस्टेट और प्रोस्टेट कैंसर के विकास को रोकने में बिच्छू बूटी को प्रभावी माना गया है. लेकिन ये सिर्फ इसके विकास को ही रोकती है.
7. पेशाब के रास्ते में संक्रमण के लिए
बिच्छू बूटी अपने मूत्रवर्धक गुणों के लिए भी जाना जाता है. अपने इस गुण के कारण ये मूत्राशय में पथरी, मूत्राशय का संक्रमण और मूत्र सम्बन्धी अन्य समस्याओं के उपचार में मदद करता है. आपको बता दें कि ये लूज मोशन और पेचिश के उपचार में भी सहायक है.
8. ऑस्टियोपोरोसिस के लिए
बिच्छू बूटी में बोरॉन नामक तत्व पाए जाने की सम्भावना रहती है. हमारी हड्डियों को ठीक रखने के लिए जिम्मेदार कैल्शियम से बोरॉन को लिंक किया जाता है. कुल मिलकर ये ऑस्टियोपोरोसिस के प्रभाव को कम करने में काफी मददगार है.
9. डिटोक्सीफिकेशन के लिए
बिच्छू बूटी में कई लाभदायक पोषक तत्व पाए जाते हैं. उनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए डिटोक्सीफायर का भी काम करते हैं. यानी ये शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर करता है. मूत्र वर्धक पदार्थ के रूप में जाना जाने वाला बिच्छू बूटी लसिका प्रणाली को भी उत्तेजित करता है. इससे गुर्दे में अनावश्यक जहरीला पदार्थ नहीं जा पाता है.
10. इन्फ्लेमेशन में लाभदायक
बिच्छू बूटी सुजन सम्बन्धी समस्याओं जैसे कि जोड़ों या मांसपेशियों के दर्द को कम करता है. इसका कारण ये है कि ये एक उत्तेजक और रुबिफ़ेशोंट पदार्थ है. इसके लिए आप इससे बनी चाय भी पी सकते हैं.
बिच्छू बूटी में कई लाभदायक पोषक तत्व पाए जाते हैं. उनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए डिटोक्सीफायर का भी काम करते हैं. यानी ये शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर करता है. मूत्र वर्धक पदार्थ के रूप में जाना जाने वाला बिच्छू बूटी लसिका प्रणाली को भी उत्तेजित करता है. इससे गुर्दे में अनावश्यक जहरीला पदार्थ नहीं जा पाता है.
10. इन्फ्लेमेशन में लाभदायक
बिच्छू बूटी सुजन सम्बन्धी समस्याओं जैसे कि जोड़ों या मांसपेशियों के दर्द को कम करता है. इसका कारण ये है कि ये एक उत्तेजक और रुबिफ़ेशोंट पदार्थ है. इसके लिए आप इससे बनी चाय भी पी सकते हैं.
1. चूँकि यह एक मूत्रवर्धक है इसलिए इसका इस्तेमाल किडनी की समस्या से पीड़ित व्यक्ति न करें.
2. इसका अधिक इस्तेमाल वीर्यस्खलन को कम करता है. दरअसल ये शुक्राणु उत्पादन के लिए जिम्मेदार अरोमाटेसेस नामक एंजाइम का उत्पादन रोकता है.3. इसमें रक्त को पतला करने की भी क्षमता होती है जो कि रक्त के थक्के बनने की क्षमता को कम करता है.
4. इससे आपको अधिक नींद आने की समस्या भी हो सकती है.
5. रक्त शर्करा के स्तर को भी कम करता है. यानी कि मधुमेह के रोगियों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए.



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