उत्तराखंड राज्य में स्थित अल्मोड़ा जिला

अल्मोड़ा भारत के उत्तराखण्ड नामक राज्य में कुमांऊँ मण्डल के अन्तर्गत एक जिला है। इस जिले का मुख्यालय भी अल्मोड़ा में ही है।
अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान और ठेठ पहाड़ी सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।अल्मोड़ा दिल्ली से 365 किलोमीटर और देहरादून से 415 किलोमीटर की दूरी पर, कुमाऊँ हिमालय श्रंखला की एक पहाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है।
आज के इतिहासकारों की मान्यता है कि सन् 1563 ई. में चन्द राजवंश के राजा बालो कल्याणचंद ने आलमनगर के नाम से इस नगर को बसाया था। चंदवंश की पहले राजधानी चम्पावत थी। कल्याणचंद ने इस स्थान के महत्व को भली-भाँति समझा। तभी उन्होंने चम्पावत से बदलकर इस आलमनगर (अल्मोड़ा) को अपनी राजधानी बनाया।सन् 1790 ई. से गोरखाओं का आक्रमण कुमाऊँ अंचल में होने लगा था। गोरखाओं ने कुमाऊँ तथा गढ़वाल पर आक्रमण ही नहीं किया बल्कि अपना राज्य भी स्थापित किया। 1801 में काशीपुर ब्रिटिश राज के अंतर्गत आया था। 1814 में आंग्ल गोरखा युद्ध छिड़ने पर ब्रिटिश सेना ने काशीपुर में पड़ाव डाला था।
11फरवरी 1819को कर्नल गार्डनर के नेतृत्व में सैनिक काशीपुर से 
कटारमल के लिए रवाना हुए। आगे चलकर कर्नल निकोलस के अंतर्गत 2000 सैनिकों की टुकड़ी भी इनमें जुड़ गई। नेपाल से हस्तिदल शाह भी 500 गोरखा सैनिकों को लेकर अल्मोड़ा की रक्षा को निकल पड़ा। विनयथल नामक स्थान पर इन दोनों के मध्य लड़ाई छिड़ गई, जिसमें गोरखा कमांडर हस्तिदल और जयराखा वीरगति को प्राप्त हो गए। इसके बाद इस संयुक्त टुकड़ी ने निकोलस के नेतृत्व में 25 अप्रैल 1895 को अल्मोड़ा पर आक्रमण किया, और आसानी से कब्ज़ा कर लिया। 27 अप्रैल को अल्मोड़ा के गोरखा अधिकारी, बाम शाह ने हथियार डाल दिए, और कुमाऊँ पर ब्रिटिश राज स्थापित हो गया। सन् 1896 ई. में अंग्रेजो की मदद से गोरखा पराजित हुए और इस क्षेत्र में अंग्रेजों का राज्य स्थापित हो गया।
स्कन्दपुराण के मानसखंड में कहा गया है कि कौशिका (कोशी) और शाल्मली (सुयाल) नदी के बीच में एक पावन पर्वत स्थित है। यह पर्वत और कोई पर्वत न होकर अल्मोड़ा नगर का पर्वत है। यह कहा जाता है कि इस पर्वत पर विष्णु का निवास था। कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि विष्णु का कूर्मावतार इसी पर्वत पर हुआ था। एक कथा के अनुसार यह कहा जाता है कि अल्मोड़ा की कौशिका देवी ने शुंभ और निशुंभ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था। कहानियाँ अनेक हैं, परन्तु एक बात पूर्णत: सत्य है कि प्राचनी युग से ही इस स्थान का धार्मिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है।

अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध मंदिर
   
 1. 
कसार” नामक गांव में स्थित ये मंदिर कश्यप पहाड़ी की चोटी पर एक गुफानुमा जगह पर बना हुआ है |कसार देवी मंदिर में माँ दुर्गा साक्षात प्रकट हुयी थी | मंदिर में माँ दुर्गा के आठ रूपों में से एक रूप “देवी कात्यायनी” की पूजा की जाती है |    



2. इस मंदिर में “देवी दुर्गा” का अवतार विराजमान है |
समुन्द्रतल से 7816 
मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर चंद वंश की “ईष्ट देवी” माँ नंदा देवी को समर्पित है | नंदा देवी माँ दुर्गा का अवतार और भगवान शंकर की पत्नी है और पर्वतीय आँचल की मुख्य देवी के रूप में पूजी जाती है | नंदा देवी गढ़वाल के राजा दक्षप्रजापति की पुत्री है , इसलिए सभी कुमाउनी और गढ़वाली लोग उन्हें पर्वतांचल की पुत्री मानते है | कई हिन्दू तीर्थयात्रा के धार्मिक रूप में इस मंदिर की यात्रा करते है क्यूंकि नंदा देवी को “बुराई के विनाशक” और कुमुण के घुमन्तु के रूप में माना जाता है | इसका इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है । नंदा देवी का मंदिर , शिव मंदिर की बाहरी ढलान पर स्थित है |


3.मंदिर निर्माण के बारे में  यह कहा जाता है कि त्रेतायुग में जब लक्ष्मण को मेघनात के द्वारा शक्ति लगी थी |तब सुशेन वेद्य ने हनुमान जी से द्रोणाचल नाम के पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा था | हनुमान जी उस स्थान से पूरा पर्वत उठा रहे थे तो वहा पर पर्वत का एक छोटा सा टुकड़ा गिरा और फिर उसके बाद इस स्थान में दूनागिरी का मंदिर बन गया |



4. चितई गोलू देवता मंदिर, उत्तराखंड के देव-दरबार
महज देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना,
वरदान के लिए ही नहीं अपितु न्याय के लिए भी जाने जाते हैं | यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक भगवान और शिव के अवतार गोलू देवता को समिर्पत है । ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था।

5. जंगलों से भरपूर पहाड़ी पर जागेश्वर अथवा नागेश के रूप में शिवालय है जागेश्वर धाम।जागेश्वर धाम मंदिर परिसर में 124 मंदिर हैं जो भगवान् शिव को उनके लिंग रूप में समर्पित हैं। हालांकि प्रत्येक मन्दिर के भिन्न भिन्न नाम हैं। कुछ शिव के विभिन्न रूपों पर आधारित और कुछ समर्पित हैं नवग्रह जैसे ब्रह्मांडीय पिंडों पर। एक मंदिर शक्ति को समर्पित है जिसके भीतर देवी की सुन्दर मूर्ति है। एक मंदिर दक्षिणमुखी हनुमान तो एक मंदिर नवदुर्गा को भी समर्पित है।


अल्मोड़ा कॉलेज
1973 में स्थापित, कुमाऊं विश्वविद्यालय में अल्मोड़ा, नैनीताल और भीमताल में तीन परिसर हैं; 3 5 संबद्ध सरकारी कॉलेज; और लगभग स्व-वित्तपोषित निजी संस्थानों की लगभग समान संख्या कुमाऊं क्षेत्र में फैली हुई है।
इस प्रकार अब तक विश्वविद्यालय द्वारा कवर किया गया कुल क्षेत्रफल 160 एकड़ का है। खूबसूरती से डिज़ाइन किए गए कॉलेज आसपास के वास्तुकला के साथ पूरी तरह से मिश्रण करते हैं और सांस लेने वाले दृश्यों को पूरा करते हैं। तकनीकी, व्यावसायिक और व्यावसायिक शिक्षा को पूरा करने के लिए, भीमताल में विश्वविद्यालय का एक और परिसर विकसित किया जा रहा है।
उत्कृष्ट शिक्षण और उच्च गुणवत्ता अनुसंधान के आदर्श वाक्य को बनाए रखने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा विशेष जोर दिया गया है। आवासीय और संबद्ध परिसरों में, शिक्षण और अनुसंधान गतिविधियां दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण कारक हैं जो पाठ्यक्रम का समर्थन करते हैं और छात्र की सीखने की आदतों में योगदान करते हैं।






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